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लेखनी प्रतियोगिता -08-Nov-2022

गुरु द्वारा है उस मनुष्य का,
जो आकाश बना है .
और प्रकाश को ख़ोज-खोज़कर,
स्वयं प्रकाश बना है ..

मानव के रग-रग में,
भरती है प्रकाश गुरु वाणी.
शब्द-कीर्तन से आनंदित,
हो जाता हर प्राणी ..

हे गुरु नानक! अमर-दीप बन,
वसुधा पर फिर आओ .
आत्म-्ज्योति की लौ से सारा,
तिमिर -ज़हर पी जाओ ..

उर को तुम फिर ज्योतित कर दो,
निज प्रकाश दे करके.
आलोकित होकर मानवता,
बिहंस उठे हर घर से ..

अंधियारी सूनीं कुटिया में,
नई रोशनीं ला दो .
बुझते मन -दीपों में फिर से,
ज्ञान की ज्योति जगा दो ..

मानव के रग-रग में भरती,
है प्रकाश गुरु-वाणी .
शब्द-कीर्तन से आनंदित,
हो जाते हर प्राणी.. ..

,शिवा, का शुभ संदेश यही,
सब गुरु-वाणीं अपनायें .
झान के पथगामीं बनकर,
जीवन सफल बनावें .. .. .. 
- अभिलाषा देशपांडे

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6 Comments

Swati chourasia

09-Nov-2022 11:21 AM

बहुत ही सुंदर रचना 👌

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Abhinav ji

09-Nov-2022 09:16 AM

Nice👍

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Punam verma

09-Nov-2022 08:05 AM

Very nice

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